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विधान परिषद नहीं जाएंगे अखिलेश, लोकसभा चुनावों की तैयारी में जुटे


लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव इस बार विधान परिषद नहीं जाएंगे और अपनी पार्टी को लोकसभा चुनावों के लिए तैयार करने में जुटेंगे। अखिलेश इस समय विधान परिषद के सदस्य हैं और उनका कार्यकाल खत्म हो रहा है। विधान परिषद के चुनावों की घोषणा हो चुकी है और सपा विधानसभा में अपनी सदस्य संख्या के आधार पर मात्र दो सीटें ही जीत सकने की स्थिति में है। पार्टी ने तय किया है कि वह एक सीट पर ही अपना उम्मीदवार उतारेगी और दूसरी सीट बसपा को देगी। बसपा अपने बलबूते कोई सीट नहीं जीत सकती है ऐसे में सपा की एक मदद से अब वह अपने एक उम्मीदवार को विधान परिषद पहुँचा सकती है।

गौरतलब है कि प्रदेश विधानमण्डल के उच्च सदन की 13 सीटों पर आगामी 26 अप्रैल को चुनाव होंगे। परिणाम भी उसी दिन घोषित किये जाएंगे। एक प्रत्याशी को जिताने के लिये प्रथम वरीयता के 29 मतों की जरूरत होगी।
अखिलेश यादव ऐलान कर चुके हैं कि वह अपने पुराने संसदीय क्षेत्र कन्नौज से चुनाव लड़ेंगे। फिलहाल यहाँ से उनकी पत्नी डिंपल यादव सांसद हैं जिनके बारे में अखिलेश ऐलान कर चुके हैं कि वह अब चुनाव नहीं लड़ेंगी। अखिलेश ने पार्टी के सभी जिलाध्यक्षों के साथ बैठक कर लोकसभा चुनावों के उम्मीदवारों के लिए संभावित नामों पर फौरी चर्चा कर भी ली है और माना जा रहा है कि बसपा और कांग्रेस के साथ सीटों का समझौता पूरा हो जाने पर इसी साल पार्टी के उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की जा सकती है।
बुधवार को पार्टी नेताओं के साथ अखिलेश ने लंबी बैठक की। सपा-बसपा के करीब आने को लेकर भाजपा नेताओं के तल्ख बयानों का जिक्र करते हुए अखिलेश ने कहा, ''इसे लेकर भाजपा में बौखलाहट है और वह हमारी तुलना जानवरों से करने लगी है। यह राजनीति में नैतिक मूल्यों की गिरावट का उदाहरण है।'' सपा अध्यक्ष ने दावा किया कि भाजपा के राज में किसान आत्महत्या कर रहे है। छोटे-छोटे उद्योग धंधे बंद हो गए हैं। जीएसटी ने व्यापार चौपट कर दिया हैं। अर्थव्यवस्था का हाल बुरा है। दस्तकारी को खतरा है। आर्थिक व्यवस्था का कारपोरेट विकल्प नहीं हो सकता है। बेरोजगार नौजवान दर-दर भटकने को मजबूर है।

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