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अमित शाह ने ली योगी सरकार की क्लास, तुरंत दिखने लगा असर


लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह बुधवार को एक दिन के दौरे पर उत्तर प्रदेश पहुँचे थे और इस बार उनके एजेंडे में संगठन के कार्य नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश सरकार की कार्यशैली को सुधारना था। यही कारण रहा कि संभवतः पहली बार ऐसा हुआ कि शाह लखनऊ आये हों और पार्टी के प्रदेश कार्यालय नहीं पहुँचे हों। शाह ने मुख्यमंत्री आवास पर ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, दिनेश शर्मा, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पाण्डेय, संगठन मंत्री सुनील बंसल और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की।
उन्नाव में भाजपा विधायक पर लगे बलात्कार के आरोप और रेप पीड़िता के पिता की जेल में संदिग्ध अवस्था में मृत्यु के मामले को लेकर योगी सरकार बैकफुट पर है। इससे सरकार की और भाजपा की छवि दागदार हुई है। बताया जाता है कि बैठक में शाह ने मुख्यमंत्री सहित पार्टी नेताओं को सख्त निर्देश दिये कि आरोपी चाहे कोई भी हो उसे बचाया नहीं जाना चाहिए। शाह के इस निर्देश के तत्काल बाद ही योगी सरकार ने मामले की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश की है और प्रदेश के प्रधान सचिव ने मामले में पुलिस की लापरवाही की बात स्वीकार की है।
उत्तर प्रदेश में सहयोगी दलों की शिकायतें हैं कि मुख्यमंत्री और अधिकारी उनकी बात सुनते ही नहीं हैं। इसको लेकर भी शाह गंभीर दिखे और सहयोगी दलों के नेताओं खासकर सुभासपा अध्यक्ष और प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर से मुलाकात की। मुलाकात के बाद राजभर संतुष्ट नजर आये। शाह ने मुख्यमंत्री को निर्देश दिये हैं कि हर 15 दिन में सहयोगी दलों के नेताओं के साथ बैठक कर उनकी बात सुनी जाये। 
इसके अलावा कुछ दलित सांसदों के द्वारा उठाये गये मुद्दों पर भी चर्चा की गयी और पार्टी स्तर पर मामला सुलझाने के निर्देश संगठन पदाधिकारियों को दिये गये। उल्लेखनीय है कि पार्टी के एक दलित सांसद ने तो पिछले दिनों यहां तक दावा किया था कि मुख्यमंत्री ने उनकी बात सुनी नहीं और डांट कर भगा दिया।
सूत्रों ने बताया है कि इस बैठक के दौरान विधान परिषद चुनाव के लिए उम्मीदवारों के नामों पर भी चर्चा की गयी। साथ ही राज्य सरकार के कुछ प्रमुख बोर्डों में की जाने वाली नियुक्तियों के नामों के बारे में भी चर्चा हुई। 

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