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उन्नाव मामला: विधायक सेंगर के खिलाफ मामला दर्ज, विपक्ष ने की गिरफ्तारी की मांग



लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस ने सत्ताधारी भाजपा के विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर नाबालिग लडकी से उन्नाव में कथित गैंगरेप का मामला आज दर्ज कर लिया। राज्य सरकार ने मामले की जांच सीबीआई से कराने का फैसला किया है। प्रमुख सचिव (गृह) अरविन्द कुमार ने यहां संवाददाताओं को बताया कि सीबीआई को जांच सौंपने का पत्र आज भेज दिया जाएगा। जब तक सीबीआई जांच को अपने हाथ में लेती है, तब तक स्थानीय पुलिस जांच जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि आरोपी भाजपा विधायक सेंगर की गिरफ्तारी के बारे में फैसला भी सीबीआई जांच के बाद मामले के गुण दोष के आधार पर करेगी।
उन्नाव पुलिस ने आज सुबह सेंगर के खिलाफ आईपीसी की विभिन्न धाराओं और पाक्सो एक्ट के तहत माखी थाने में एफआईआर दर्ज की गयी। सवालों के जवाब में कुमार और पुलिस महानिदेशक ओ पी सिंह ने कहा कि मजिस्ट्रेट के समक्ष दिये बयान में पीडिता ने विधायक का नाम नहीं लिया था लेकिन अब पीडिता और उसके परिवार वालों ने विशेष जांच टीम (एसआईटी) से बताया है कि वे भयवश पहले ऐसा नहीं कर पाये थे। अब सेंगर के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। विधायक को पुलिस बचाने का प्रयास कर रही है, इन आरोपों से इंकार करते हुए कुमार और सिंह ने कहा कि इसी वजह से मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गयी है।
इस बीच पुलिस महानिदेशक ओ पी सिंह ने प्रेस कांफ्रेंस में आज कहा, 'माननीय विधायक जी के विरूद्ध जो बलात्कार का आरोप लगाया गया है ...।' उनके ऐसा कहने पर पत्रकारों ने आपत्ति की कि बलात्कार के आरोपी को माननीय विधायक जी क्यों कहा जा रहा है। सिंह ने हालांकि बचाव की मुद्रा में आते हुए कहा कि आरोपी को सम्मान इसलिए दिया जा रहा है क्योंकि वह विधायक हैं। वह अभी तक दोषी नहीं हैं। उनके खिलाफ आरोप भर लगा है और मामला जांच के लिए सीबीआई को सौंपा जा रहा है। अब सीबीआई गुण दोष के आधार पर तय करेगी कि विधायक को गिरफ्तार किया जाए या नहीं। उन्होंने बताया कि सरकार ने पीडिता के परिवार को सुरक्षा मुहैया कराने का फैसला भी किया है।
अधिकारियों ने आश्वस्त किया कि किसी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। कुछ पुलिसकर्मियों और ​डाक्टरों के खिलाफ लापरवाही के लिए कार्रवाई पहले ही की जा चुकी है। कुमार ने कहा कि सरकार ने तय किया है कि पिछले साल चार जून की घटनाओं :कथित बलात्कार: के सिलसिले में मामला दर्ज करने के बाद इसे सीबीआई को हस्तांतरित किया जाए और चूंकि तीन अप्रैल (पीडिता के पिता की पिटाई और मौत के सिलसिले में क्रास एफआईआर) से संबद्ध दो अन्य मामले भी इसी संबंध में हैं इसलिए ये सभी मामले सीबीआई को हस्तांतरित किये जाएं। बलात्कार के आरोपी भाजपा विधायक की गिरफ्तारी की मांग को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ता आज राजधानी की सडकों पर उतर आये ।
वहीं बसपा सुप्रीमो मायावती ने आशंका जतायी कि योगी सरकार द्वारा प्रकरण की जांच सीबीआई को सौंपने का फैसला करने से यह मामला ठंडे बस्ते में जा सकता है। कांग्रेस महिला एवं युवा इकाइयों के कार्यकर्ताओं की प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों से झडप हुई। वे मुख्यमंत्री आवास की ओर जाना चाह रहे थे। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की । वे विधायक की गिरफ्तारी की मांग कर रहे थे। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बर्खास्तगी की मांग की थी।
वहीं मायावती ने एक बयान में कहा कि विधायक को गिरफ्तार करने की बजाय मामले की सीबीआई जांच का आदेश देना संदेह पैदा करता है कि यह मुद्दा मध्य प्रदेश के व्यापम मामले की ही तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा। मायावती ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को राज्य की जनता से माफी मांगनी चाहिए, जहां से वह सांसद हैं।
गौरतलब है कि यह मामला तब खुला, जब कथित बलात्कार पीडिता ने मुख्यमंत्री आवास के सामने आत्मदाह की कोशिश की। उसका आरोप था कि पुलिस भाजपा विधायक पर कार्रवाई नहीं कर रही है। मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच टीम :एसआईटी: ने कल रात सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसके बाद विधायक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और मामला सीबीआई को हस्तांतरित करने का फैसला किया गया।
पीडिता ने आज मांग की कि विधायक को तत्काल गिरफ्तार किया जाए। सीबीआई जांच बाद में भी हो सकती है। सत्रह वर्षीय पीडिता ने कहा, 'जांच से हमें आपत्ति नहीं है लेकिन उन्हें :विधायक: पहले गिरफ्तार किया जाना चाहिए ... उन्हें क्यों बचाया जा रहा है।’’ उसने कहा कि अगर विधायक गिरफ्तार नहीं हुआ तो वह 'मेरे चाचा को मार देंगे। जब वह गिरफ्तार हो जाएंगे, मुझे तभी संतोष होगा और मैं कह सकूंगी कि भाजपा सरकार न्याय कर रही है।’’

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