साइबर जासूसी के लिहाज से US के लिए बड़ा खतरा हैं चीन, रूस और ईरान

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वॉशिंगटन। अमेरिका ने चीन, रूस और ईरान की पहचान ऐसे देशों के तौर पर की है जो उसकी संवेदनशील आर्थिक सूचनाओं, व्यापार से जुड़ी गोपनीय बातों और प्रौद्योगिकियों को हासिल करने के मामले में आक्रामक और सक्षम हैं। राष्ट्रीय गुप्तचर निरोधक एवं सुरक्षा केंद्र ने कल जारी अपनी वार्षिक रिपोर्ट ‘साइबर जगत में विदेशी आर्थिक जासूसी’ में कहा कि अमेरिका से करीबी रिश्ते रखने वाले देशों ने भी अमेरिकी तकनीक हासिल करने के लिए साइबर जासूसी कराई है।

रिपोर्ट के मुताबिक कि साइबर सुरक्षा में तरक्की करने के बाद भी साइबर जासूसी कम लागत होने के कारण खतरा बनी हुई है और इससे व्यापक बौद्धिक संपदा तक पहुंच कायम होने की आशंका रहती है। इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया, ‘हमें अंदेशा है कि चीन, रूस और ईरान अमेरिका की संवेदनशील आर्थिक सूचनाओं एवं प्रौद्योगिकियों, खासकर साइबर जगत में, को इकट्ठा करने के मामले में आक्रामक और सक्षम बने रहेंगे। यह सभी अच्छा-खासा संसाधन लगाते रहेंगे और विभिन्न चाल चलते रहेंगे ताकि बौद्धिक संपदा और अहम सूचनाएं हासिल कर सकें।’

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी प्रौद्योगिकी को हासिल करने के लिए चीन ने अपने प्रयासों में विस्तार किया है। वह अपने रणनीतिक विकास लक्ष्यों-विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में आधुनिकीकरण, सैन्य आधुनिकीकरण और आर्थिक नीति के उद्देश्यों- के समर्थन के लिए साइबर जासूसी कर ही रहा है। रूस के बारे में रिपोर्ट में कहा गया है कि वह अपने लिए जरूरी सूचनाएं हासिल करने की खातिर साइबर जगत सहित कई अन्य तरीकों का इस्तेमाल कर रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, रूस खुफिया सूचनाएं इकट्ठा करने के लिए साइबर तंत्र को उपकरण के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है। रिपोर्ट में ईरान के बारे में कहा गया है कि वह आर्थिक एवं औद्योगिक जासूसी के उद्देश्यों के लिए अमेरिकी नेटवर्कों में सेंध लगाने की कोशिश करता रहेगा।

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