यूपी: 80 साल बाद घोड़े पर निकली दलित की बारात, 350 पुलिसकर्मियों की निगरानी में हुई शादी

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कासगंज – जिले में दलित जोड़े की शादी पुलिस की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था में हुई जिसकी खास बात यह थी कि बारातियों से ज्यादा संख्या सुरक्षा में लगे पुलिसकर्मियों की थी। हाथरस के संजय जाटव और कासगंज की शीतल की शादी कल रविवार की शाम धूमधाम के साथ संपन्न हुई। निजामपुर गांव में पहुंचा दूल्हा घोड़ी पर सवार होकर अपनी दुल्हन के घर गया।

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक इस गांव में 80 साल बाद किसी दलित शख्स की घोड़े की बग्घी पर बारात निकाली गई। दुल्हन ने कहा, ‘ऊंची जाति के लोगों ने कहा कि इससे पहले ऐसा कभी नहीं हुआ और अब वे हम पर हमले करने की धमकी दे रहे हैं लेकिन हमें डर नहीं है क्योंकि हमें पुलिस सुरक्षा मिली हुई है।’

इस तरह के आरोप लग रहे थे कि दलित दूल्हे के घोड़ी पर चढ़ने को लेकर गांव के उच्च जाति के लोगों को आपत्ति थी लेकिन पुलिस ने ऐसी किसी भी आपत्ति की बात को पूरी तरह से खारिज कर दिया। कासगंज के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पवित्र मोहन त्रिपाठी ने आज बताया कि हाथरस का संजय कासगंज के निजामपुर गांव की शीतल से इसी वर्ष 30 अप्रैल को शादी करना चाहता था लेकिन चूंकि लड़की नाबालिग थी इसलिए उसे शादी की इजाजत नहीं दी गई।

इस बीच गांव में यह अफवाह फैल गई कि चूंकि लड़का दलित है और गांव में अधिक संख्या उच्च वर्ग के लोगों की है इसलिए उच्च वर्ग के लोग दलित लड़के को घोड़ी पर नहीं बैठने देना चाहते। जिसके बाद संजय ने इस मामले में पहले जिला प्रशासन से गुहार लगाई थी।

एएसपी त्रिपाठी ने कहा कि उच्च वर्ग के विरोध की बात गलत थी। लड़की नाबालिग थी इसलिए शादी की इजाजत प्रशासन द्वारा नहीं दी गई थी। अब जब लड़की बालिग हो गई तो कल शाम संजय हाथरस से बारात लेकर आया। उसके साथ करीब 150 बाराती आए थे। दूल्हे और बारातियों के डर को कम करने के लिए पुलिस के सुरक्षा घेरे में बारात निकाली गई और गांव के किसी भी उच्च जाति के व्यक्ति ने इसका कोई विरोध नही किया।

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