दूसरे तारामंडल से सौरमंडल में आए अप्रवासी क्षुद्रग्रह की खोज, विपरीत दिशा में कर रहा सूर्य की परिक्रमा

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वैज्ञानिकों ने किसी अन्य तारा मंडल से हमारे सौरमंडल में आए पहले घुमंतू अप्रवासी क्षुद्रग्रह (एस्टरॉयड) की खोज की है। फिलहाल बृहस्पति की कक्षा में मौजूद 2015 बीजेड509 नाम का यह क्षुद्रग्रह विपरीत दिशा में सूर्य का चक्कर लगा रहा है।

-विपरीत दिशा में कर रहा सूर्य की परिक्रमा

-लंबे समय से बृहस्पति की कक्षा में है स्थित

हमारे सौरमंडल के सभी ग्रह व अन्य खगोलीय पिंड एक ही दिशा में सूर्य का चक्कर लगाते हैं, लेकिन यह क्षुद्रग्रह कक्षा की विपरीत दिशा यानी रेट्रोग्रेड ऑर्बिट में घूम रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर यह हमारे सौरमंडल का पिंड होता तो इसे भी अन्य ग्रहों की दिशा में ही घूमना चाहिए था। फ्रांस के नेशनल साइंटिफिक रिसर्च सेंटर के वैज्ञानिक फातही नामौनी के अनुसार, यह क्षुद्रग्रह बृहस्पति की कक्षा में कैसे आया, इसका अभी पता नहीं चल सका है।

पिछले साल भी इस तरह के एक अप्रवासी क्षुद्रग्रह की खोज हुई थी लेकिन वह केवल हमारे सौरमंडल के पास से होकर गुजरा था। जबकि 2015 बीजेड509 लंबे समय से हमारे सौरमंडल में मौजूद है। वैज्ञानिकों का कहना है कि सूर्य की तरह अन्य तारों की भी अपनी एक प्रणाली होती है, जिसमें मौजूद ग्रह और क्षुद्रग्रह उसका चक्कर लगाते हैं। तारों के एक-दूसरे के नजदीक आने और ग्रहों के गुरुत्व बल के कारण कई क्षुद्रग्रह दूसरे तारामंडल में प्रवेश कर जाते हैं।

संभावना जताई जा रही है कि इस स्थायी अप्रवासी क्षुद्रग्रह की खोज से ग्रहों के निर्माण और सौरमंडल के विकास से जुड़े कई रहस्य खुलेंगे। अगर पता लग जाए कि 2015 बीजेड509 कब और कैसे हमारे सौरमंडल में आया तो इससे धरती के वायुमंडल के निर्माण और इस पर जीवन संभव हो पाने के रहस्य को जाना जा सकता है।

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