सवर्णों को आरक्षण देने से जुड़ा संविधान संशोधन बिल पेश; कांग्रेस, आप और एनसीपी देगी समर्थन

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नई दिल्ली – केंद्र ने सवर्णों को आर्थिक आधार पर शिक्षा और सरकारी नौकरियों में 10% आरक्षण देने से जुड़ा 124वां संविधान संशोधन बिल मंगलवार को सदन में पेश किया। केंद्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत ने इसे पटल पर रखा। इस बिल को बसपा, कांग्रेस, आप और एनसीपी ने समर्थन देने की बात कही है। उधर, डीएमके ने इसका विरोध किया है। लोकसभा में आज विंटर सेशन का आखिरी दिन है।

इससे पहले बसपा प्रमुख मायावती ने कहा, “सवर्ण आरक्षण के प्रस्ताव का उनकी पार्टी समर्थन करेगी। लोकसभा चुनाव से पहले लिए गया यह फैसला हमें सही नीयत से लिया गया नहीं लगता है। यह चुनावी स्टंट और राजनीतिक छलावा लगता है। अच्छा होता अगर भाजपा सरकार यह फैसला चुनाव के और पहले लेती।” उन्होंने कहा कि बाबासाहेब के अथक परिश्रम और त्याग के बाद ही गरीब और शोषित वर्ग के दलित और आदिवासियों को आरक्षण दिए जाने की व्यवस्था काफी पुरानी हो चुकी है। इसलिए एससी-एसटी ओबीसी को उनकी आबादी के अनुपात के हिसाब से आरक्षण दिए जाने की व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।

आरक्षण के लिए 5 प्रमुख मापदंड :  

  • परिवार की सालाना आमदनी 8 लाख रु. से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। 
  • परिवार के पास 5 एकड़ से ज्यादा कृषि भूमि नहीं होनी चाहिए।
  • आवेदक के पास 1,000 वर्ग फीट से बड़ा फ्लैट नहीं होना चाहिए।
  • म्यूनिसिपलिटी एरिया में 100 गज से बड़ा घर नहीं होना चाहिए। 
  • नॉन नोटिफाइड म्यूनिसिपलिटी में 200 गज से बड़ा घर न हो।

संविधान (124वां संशोधन) बिल 2019 में क्या है? 

अभी संविधान में जाति और सामाजिक रूप से पिछड़ों के लिए आरक्षण का प्रावधान है। संविधान में संशोधन कर अनुच्छेद 15, 16 में आर्थिक आधार पर आरक्षण का प्रावधान जोड़ा जाएगा। अभी एससी को 15%, एसटी को 7.5% और ओबीसी को 27% आरक्षण दिया जा रहा है।

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