मनमानी के खेल से स्कूलों में ठंडे पड़े मिड डे मील के चूल्हे

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जौनपुर – जिले से कुपोषण व शैक्षिक पिछड़ेपन को दूर करने की नीति आयोग की मंशा परवान नहीं चढ़ पा रही है। परिषदीय स्कूलों में नौनिहालों के मध्याह्न भोजन में बड़े पैमाने पर हो रहा खेल अफसरों के संरक्षण में फल-फूल रहा है। प्रधान व शिक्षक की खींचतान से कहीं मिड डे मील के चूल्हे ठंडे पड़े हैं, तो कहीं नौनिहालों को गुणवत्ता विहीन मध्याह्न भोजन परोसा जा रहा है। घटिया भोजन खाने से नौनिहालों की सेहत सुधरने के बजाय उनमें बीमारी फैलने की आशंका बनी रहती है।

बच्चों को सेहतमंद बनाने के लिए स्कूलों में दूध व फल वितरण की योजना भी गुरुजनों के मनमानी की भेंट चढ़ गई है। जिम्मेदार अफसर धरातल पर उतरने को तैयार नहीं हैं। जिससे नौनिहालों को गुणवत्तापूर्ण भोजन नसीब नहीं हो पा रहा है। नौनिहालों को गुणवत्ताविहीन मध्याह्न भोजन परोसा जा रहा है। बच्चों को मिला सब्जी-चावल गुणवत्ता से परे दिखाइ देता है। आलू-सोयाबीन की सब्जी पानी व नमक-मसाले में उबालकर बनाई गई मिलती है। जिसमें तेल-मसाले की जगह पानी लबालब भरा रहता है। चावल भी अधोमानक दिखाई देता है। अध्यापक बताते है कि ग्राम प्रधान जो भोजन बनवाते हैं, वह नौनिहालों को दिया जाता है।

समस्याओं के बारे में उच्चाधिकारियों को कई बार अवगत कराया गया लेकिन, कोई कार्रवाई नहीं हुई। सैकड़ो प्राथमिक विद्यालयो के रसोईघर में ताला लगा हुआ है। मिड डे मील का चूल्हा ठंडा पड़ा है। तमाम स्कूलो  जुलाई में एक भी दिन खाना नहीं बना है। बच्चे खाना खाने घर जाते हैं। जिले में ऐसे कई स्कूल हैं जहां मध्याह्न भोजन योजना में घोर अनियमितता बरती जा रही है लेकिन, जिम्मेदार सब कुछ जानकर भी अनजान बने हुए हैं।

बीएसए का कहना है कि स्कूलों में बच्चों को नियमित भोजन देने का निर्देश दिया गया है। लापरवाही बरतने वाले शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। राशन उपलब्ध न कराने व घटिया भोजन की शिकायतें मिल रही हैं। उच्चाधिकारियों से वार्ता कर समस्या का समाधान कराया जाएगा।

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