गोंडाः वनटागियां गांवों को मिला राजस्व गांव का दर्जा

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गोंडा – वनटांगियां के लिए शुक्रवार का दिन ऐतिहासिक रहा। उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने उनके गांवों को राजस्व ग्राम घोषित किया। आजादी से लेकर आज तक इन गांवों को राजस्व ग्राम का दर्जा न होने के कारण किसी भी योजनाओं का लाभ नहीं मिलता था। गोंडा पहुंचे सीएम योगी ने वनटांगिया समुदाय को संवैधानिक अधिकार दिलाते हुए प्रत्येक वनटांगिया को 10 बीघा जमीन भी दी। जलौनी लकड़ी काटकर बेचकर पेट पालने वाले सौ से ज्यादा वनटंगियों के परिवार को आजादी के बाद पहली बार वोट का हक मिला है। अब वह लोकसभा के 2019 में होने वाले चुनाव में वह पहली बार वोट के अधिकार का प्रयोग करेंगे।

शुक्रवार को मनकापुर तहसील के वन टांगिया ग्राम अशरफाबाद में पहुंचे सीएम योगी ने कार्यक्रम की शुरुआत की। मुख्यमंत्री ने वनटंगियों के अशरफाबाद, बुटहनी, रामगढ व मनीपुर को राजस्व ग्राम घोषित करके सरकारी सुविधाओं से इन गांवों में रहने वाले 122 परिवारों को लाभांवित किया। उन्होंने कहा कि अधिकारी यह सुनिश्चि करें कि वन टांगिया गांवों को सभी सरकारी सुविधाओं का लाभ दिया जाए और इन्हें आपस में जोड़ने के लिए सड़क का निर्माण किया जाए। महिलाओं को गैस कनेक्शन, गांव को बिजली और राशन की सुविधा सुनिश्चित कराई जाए। सीएम ने कहा कि वह चाहतेहैं कि प्रदेश के सांसद व विधायक दीवाली व अन्य पर्व इन गांवों के लोगों के साथ मनाएं।

ऐसे नाम पड़ा वनटांगिया

वनटांगिया परिवारों की शुरुआत सन 1918 के आसपास की मानी जाती है। भारत में रेलवे का विस्तार किया जा रहा था। पटरियां बिछाने के लिए साखू की लकड़ियों की बड़े पैमाने पर जरूरत पड़ने लगी। नतीजा यह हुआ कि साखू के जंगल साफ होने लगे। उस वक्त अंग्रेजी हुकूमत ने बड़े पैमाने पर साखू के जंगल लगाने का फैसला किया। इसके लिए अंग्रेजों ने बर्मा की टांगिया पद्धति अपनाई। उस वक्त वन विभाग के कुछ अधिकारी बर्मा गए और वहां जाकर खेती करने की टांगिया पद्धति सीखी। भारत आकर उन्होंने गरीब और मजदूर तबके के लोगों को टांगिया पद्धति का प्रशिक्षण दिया। भारी तादाद में कामगारों को जंगल उगाने में लगा दिया। टांगिया पद्धति से वन उगाने वाले इन मजदूरों को वनटांगियां कहा जाने लगा।

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