शिक्षामित्र एसोसिएशन उत्तर प्रदेश : सात सूत्रीय मांगों को लेकर धरने पर बैठे आम शिक्षक

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काकोरी (ज्ञान सिंह) – सपा सरकार के समय से शिक्षामित्र अपनी मांगों को लेकर समय-समय पर धरना प्रदर्शन के माध्यम से अपनी मांगों को मनवाने के लिए सरकार के समक्ष प्रस्तुत होते रहे हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार उनकी मांगों को हर बार दरकिनार करती नजर आ रही है। आलम यह  हो गया है कि आज शिक्षा मित्र को दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही है। लेकिन सरकार उन पर किसी भी प्रकार के रहमत करती नहीं दिखाई दे रही है। जिन शिक्षामित्रों का समायोजन हो गया था उसको भी इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 25 जुलाई 2017 को रद्द कर दिया और तब से लेकर आज तक शिक्षामित्र जगह-जगह धरना प्रदर्शन कर अपनी मांगों के लिए सरकार से गुहार लगाते रहे।

लेकिन सरकार की तरफ से उन्हें सिर्फ तसल्ली ही मिली जोकि कागजों पर ही बनी रही। वास्तविक रूप में क्या हुआ क्या नहीं हुआ इसकी तरफ ना तो शासन ध्यान दे रहा है और ना ही प्रशासन। दोनों ही मुख दर्शक बने बैठे हुए हैं नतीजा हमेशा शून्य ही बना रहता है। मुख्यमंत्री ने शिक्षामित्रों के लिए एक फरमान जारी किया था कि जिन शिक्षामित्रों का समायोजन कर उनको दूसरे विद्यालय में तैनाती दी गई थी। उनको वहां से वापस कर उनके मूल विद्यालयो में वापस रख लिया जाए लेकिन प्रशासन इस बात को मानने से तैयार नहीं है की उनको वापस रखा जाएगा भी या नहीं आज धीरे धीरे 1 साल 6 माह हो चुका है। शिक्षामित्र आज भी उसी तरह दर-दर की ठोकरे खा रहा है लेकिन सरकार शिक्षामित्रों के प्रति जरा भी चिंतित दिखाई नहीं पड़ रही है।

प्रदेश अध्यक्ष उमा देवी एवं मीडिया प्रभारी राम सिंह ने बताया की शिक्षामित्र में गठित कमेटी के समक्ष संगठन की मांग निम्न वत है।

  • शिक्षामित्रों को नवी अनुसूची में शामिल किया जाए।
  • राज्य सरकार शिक्षा मित्र हित में पैरा 4 में संशोधन करें।
  • अपग्रेड पैरा टीचर 38878 रु जो केंद्र सरकार दे रही है प्रदेश सरकार देने की कृपा करें ।
  • 12 महीने 62 वर्ष सेवा का निर्धारण व सामान कार्य समान वेतन।
  • प्री प्राइमरी की व्यवस्था कर समायोजन।
  • आसमायोजित को समायोजन का मौका।
  • मृतक शिक्षामित्रों को मुआवजा और एक आश्रित को नौकरी।

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